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इलेक्टोरल बॉण्ड से चिंतित चुनाव आयोग की सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी

WikiFX
| 2019-03-28 15:19

एब्स्ट्रैक्ट:इमेज कॉपीरइटGetty Imagesनिर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी है कि चुनाव बॉण्ड को मंज़ूरी दे

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निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी है कि चुनाव बॉण्ड को मंज़ूरी देने के सिलसिले में जो ढेर सारे कानूनी बदलाव किए गए हैं उससे चुनाव ख़र्च के मामले में पारदर्शिता पर गंभीर असर पड़ेगा.

निर्वाचन आयोग ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि उसने अपनी चिंता से केंद्रीय विधि मंत्रालय को आगाह करा दिया है.

हलफ़नामे में कहा गया है, “आयोग ने विधि और न्याय मंत्रालय को बताया है कि फ़ाइनेंस एक्ट 2017 के कुछ प्रावधानों की वजह से, और इनकम टैक्स एक्ट, जनप्रतिधित्व कानून और कंपनीज़ एक्ट में किए बदलावों के कारण राजनीतिक दलों की फंडिंग के मामले में पारदर्शिता पर गंभीर असर पड़ेगा.”

निर्वाचन आयोग ने एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स (एडीआर) की याचिका का जवाब देते हुए यह हलफ़नामा दाखिल किया है, इसमें सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि सरकार ने चुनाव बॉण्ड की व्यवस्था लागू करने के लिए जितने फेरबदल किए हैं उन्हें असंवैधानिक करार देते हुए रद्द घोषित करे.

केंद्र सरकार का कहना है कि “इलेक्टोरल बॉण्ड चुनाव सुधार की दिशा में एक अहम कदम है”.

  • यह भी पढ़ें | लोकसभा चुनाव 2019: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिपोर्ट कार्ड

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सरकार ने फ़ाइनेंस एक्ट, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट, जनप्रतिनिधित्व कानून, इनकम टैक्स कानून, कंपनीज़ एक्ट और विदेशी अनुदान नियंत्रण कानून (एफ़सीआरए) में बदलाव किए हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि इन बदलावों की वजह से राजनीतिक दलों को किसने कितना पैसा दिया यह पारदर्शी नहीं रह जाएगा.

चुनाव आयोग ने कहा कि इलेक्टोरल बॉण्ड से राजनीतिक दलों को जो पैसा मिलेगा उसे रिपोर्ट करने की बाध्यता नहीं है, इसलिए चुनावों में काले धन के इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाएगी. फ़र्ज़ी कंपनियों, सरकारी कंपनियों और विदेशी कंपनियों से राजनीतिक दलों की जो फंडिंग होगी उस पर किसी का नियंत्रण नहीं होगा, और न ही यह जानकारी मिलेगी कि पैसा कहां से आया.

इसके अलावा आयोग ने अपने हलफ़नामे में चिंता जताई है कि विदेशी स्रोतों से बेरोक-टोक आने वाले असीमित पैसे की वजह से विदेशी ताकतें सरकार के निर्णयों को प्रभावित करने की स्थिति में होंगी जो बहुत ख़तरनाक है.

एडीआर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होनी है.

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